उदंती.com, अक्टूबर- 2026
वर्ष- 19, अंक- 3 जब तक हम अपने किसानों के अधिकारों का समर्थन नहीं करेंगे, तब तक विकास संभव नहीं। -लाल बहादुर शास्त्रीइस अंक में अनकहीःकब मिलेगी नारी को वास्तविक बराबरी ? - डॉ. रत्ना...
View Articleअनकहीः कब मिलेगी नारी को वास्तविक बराबरी?
डॉ. रत्ना वर्माकुछही दिनों में आदिशक्ति की आराधना का पावन पर्व नवरात्र का शुभारंभ होने वाला है। इन नौ दिनों में पूरा देश देवी दुर्गा की भक्ति, गरबा की उमंग और अनुष्ठानों के उल्लास में सराबोर हो जाता...
View Articleधरोहरः दुनिया के आश्चर्य को समेटे सरगुजा
- रविन्द्र गिन्नौरे सरगुजामें एशिया की सबसे पहली रंगशाला है, सीता बेंगरा। सोलह सौ फीट ऊँचे पहाड़ की चट्टान को तराश कर बनी है यह रंगशाला। ऐसे मुक्ताकाशी रंगमंच (ओपन एयर थिएटर) की परंपरा वैदिक काल से...
View Articleलघुकथाः उम्मीद के पंख
- अनीता पंडा ‘अन्वी’ (यू एस)रातमें धमाका हुआ। बारूद की गंध बिना छत की पत्थर की दीवारों से अब भी आ रही थी। मेहर शेष बचे अपने लकड़ी के घर के पास खड़ी थी। पास ही रखा सिर्फ एक जूता भरे-पूरे परिवार कहानी...
View Articleव्यक्तित्वः देश के बेमिसाल लाल, लाल बहादुर शास्त्री
-हरी राम यादव जय जवान, जय किसान का नारा 1965 के बाद देश के हर बच्चे, बूढ़े और युवा की जबान पर था, बच्चे गलियों में चलते हुए यह नारा लगाया करते थे। एक बच्चा जय जवान बोलता था तो साथ का दूसरा बच्चा जय...
View Articleविज्ञानः मनुष्य बनने की ओर कृत्रिम बुद्धि रोबोट
- प्रमोद भार्गव महात्मा गांधी और विनोबा भावे के अहिंसक विचारों के समर्थक ऑस्ट्रेलियाई मूल के एक दार्शनिक हुए हैं, इवान इलिच, जो अंग्रेजी के अलावा तमाम भाषाओं के साथ हिंदी भी जानते थे। इलिच का विचार...
View Articleआलेखः आधी दुनिया की पूरी कहानी
- डॉ. योगिता जोशी “स्त्री केवल जीवन को जन्म नहीं देती, वह जीवन को अर्थ भी देती है।”सृष्टि का समूचा विस्तार यदि किसी एक शब्द में समाहित किया जा सकता है, तो वह शब्द है- ‘स्त्री’। वह प्रकृति की सबसे...
View Articleशोधः नींद पूरी होने का हिसाब रखता है मस्तिष्क
नींद की कमी एक बड़ी समस्या है और कई हादसों का कारण बनती है। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में नींद की गुणवत्ता और नींद की कमी के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है। वॉशिंगटन युनिवर्सिटी...
View Articleकविताः तू रहना माँ
- डॉ. कनक लता मिश्रामाँ तू रहना तू रहना माँ तब भी, जब मैं हताश हो जाऊँ,चाहूँ आसमान छुना पर ख़ुद को बहुत छोटा पाऊँ चाहूँ स्वच्छंद उड़ना पर पंखों में उड़ान न पाऊँ जमाना चाहूँ अपनी अस्मिता की जड़ें पर...
View Articleकविताः माँ तुम थी तो
- कृष्णा वर्मामाँतुम्हारे जाते ही रीत गई थीमेरे भीतर की गागर एक झटके में धुँधला गईं थीं आँखें और अटक कर रह गईं थीं साँसें आज समझ में आया था क्या होता हैकमर टूटने का असल अर्थ सारी खुशियाँ जा बैठी थीं...
View Articleयादेंः मीठी नींद, मीठे सपने
- शशि पाधानींदतो बेशक मीठी होती है लेकिन मीठे सपने? आश्चर्यचकित तो नहीं हो रहे आप ? सच कहूँ तो मुझे कई बार एक सपना आता है जो मेरी जिह्वा पर मिश्री घोल के रख देता है। आँख खुलते ही ऐसा लगता है जैसे...
View Articleसॉनेटः मुक्त हो जाओ
- अनिमा दास त्याग दूँ.. स्मृतियों की भावपूर्ण उर्मियों कोकि हृदयार्णव हो जाए निश्चल व गरलमय अभेद्य अध्वर की असहायता में है श्वास जोहो भस्म में सुगंध श्मशान हो मेरा निलय मैं नहीं ककुंजल जो करूँ...
View Articleलघुकथाः ज़रूरत
- आनन्द हर्षरंग-बिरंगेसजे पंडाल, सफेद और लाल- हरी- गुलाबी रोशनियों से नहाई हुई कनातें, एकदम असली लगने वाले प्लास्टिक के फूल और गुलदस्तों से सजा स्टेज, बारातियों के लिए सजाई गए स्टाल, जहाँ तरह–तरह के...
View Articleकहानीः स्कूल-ट्रिप
- कुलबीर बड़ेसरों, पंजाबी से अनुवाद - सुभाष नीरव“मम्मी,इस बार हमारे स्कूल का ट्रिप जा रहा है -पिंक सिटी… प्लीज़, इस बार मुझे भेज दो। पिछली बार आगरा गया था, तब तुमने मुझे नहीं भेजा था।’’“हाँ, तू छोटी है...
View Articleव्यंग्यः गुमशुदा और शादीशुदा
- अख़तर अली पहलेगुमशुदा आदमी ज़्यादातर शादीशुदा आदमी निकलते थे। अब गुमशुदा आदमी शत प्रतिशत शादीशुदा निकलते है। जो शादीशुदा नहीं है, उसे भला गुमशुदा होने की क्या ज़रूरत? अगर कोई आदमी लापता हो गया है, तो...
View Articleलघुकथाः स्मृतियाँ
- नमिता सिंह 'आराधना' कुछ वर्षों पहले मैं अपने माँ- बाबूजी के पास अपने पैतृक घर गया था, जहाँ मेरा पूरा बचपन गुजरा था। किसी काम से मैंने माँ की अलमारी खोली थी तो आश्चर्य से भर गया था। मेरे बचपन के...
View Articleकिताबेंः रचना के आंतरिक सौंदर्य और संवेदना का रेखांकन
- डॉ. सुरंगमा यादवपुस्तकः सृजन- दृष्टि (समीक्षा- संग्रह): डॉ. शिवजी श्रीवास्तव, पृष्ठ - 192, मूल्य - 550/- , प्रकाशन - अयन प्रकाशन, उत्तम नगर, नई दिल्ली -110059साहित्य जगत से लेकर सिनेमा कला या कोई...
View Articleकुण्डलियाः पंख फैलाती रहना
- परमजीत कौर ‘रीत’1.पथ के कंटक भूलकर, बढ़ते जाओ मीत । आने वाला हर दिवस, दे जाएगा जीत ।। दे जाएगा जीत, काल की बोली कहती । प्रतिपल दे संकेत, हमें चेताती रहती । मिले नहीं नवनीत, 'रीत'पानी को मथ के । करते...
View Articleउदंती.com, सितम्बर - 2026
चित्रः डॉ. सुनीता वर्मा भिलाई, छत्तीसगढ़ वर्ष -19, अंक - 2"प्रकृति का अध्ययन करो, प्रकृति से प्रेम करो, प्रकृति के करीब रहो। प्रकृति तुम्हें कभी निराश नहीं करेगी।" - फ्रैंक लॉयड राइटअनकहीःनेपाल आपदाः...
View Articleअनकहीः नेपाल आपदाः प्रकृति का कहर या...
- डॉ. रत्ना वर्मा नेपालमें हाल की भयावह प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर पूरी दुनिया को यह सोचने के लिए विवश कर दिया है कि आखिर हम ऐसी त्रासदियों को किस नजरिये से देखें। पहाड़ों के बीच अचानक उमड़ा पानी,...
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