प्रसंगः लड़का और आयरिश टोप
- आदित्य पाधा, अनुवाद- शशि पाधा "हवाको सुनो, वह बातें करती है। मौन को सुनो, वह बोलता है। अपने हृदय को सुनो, वह जानता है।"— एक नेटिव अमेरिकन कहावतयह कहानी पुनर्जन्म की है- यदि आप ऐसी बातों पर विश्वास...
View Articleलघुकथाः दूसरा सरोवर
-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'एकगाँव था। उसी के पास में था स्वच्छ जल का एक सरोवर। गाँववाले उसी सरोवर का पानी पीते थे। किसी को कोई कष्ट नहीं था। सब खुशहाल थे।एक बार उजले-उजले कपड़े पहनकर एक आदमी गाँव में...
View Articleशौर्यः सिपाही बबलू सिंह - सेना मेडल (मरणोपरांत)
- हरी राम यादव, सूबेदार मेजर (ऑनरेरी)वीरता शब्द मनोभावों की वह पराकाष्ठा है जिसके आगे दुनिया का हर बल बौना हो जाता है । इस मनोभाव के पैदा होते ही सामने खड़े प्रतिद्वंद्वी की शक्ति, साहस सब कम पड़ जाते...
View Articleआलेखः पत्रों में लोक-संग्राम
- प्रमोद भार्गवहमारे यहाँ स्वतंत्रता संग्राम के इतिहासबद्ध लेखन के परिप्रेक्ष्य में उन पत्रों और साक्ष्यों को लगभग बहिष्कृत किया गया है, जो पत्र और साक्ष्य क्रांतिवीरों ने युद्ध की रणनीति सुनिश्चित...
View Articleपर्व - संस्कृतिः हरेली तिहार आ गे
- रविन्द्र गिन्नौरेसावनमास की अमावस्या, जब वसुंधरा हरित परिधान ओढ़ लेती है। गाँव- गँवई के खेत खलिहान, नदी, तालाब जल से छलक- छलक उठते हैं। खेतों में धान के बिरवा हर ओर हरियाते नज़र आने लगते हैं जो...
View Articleयादें/श्रद्धांजलिः तीजन बाई के साथ वे दो घंटे
दुनिया भर में गूँजी जिसकी हुंकार - डॉ. रत्ना वर्माहाल ही में छत्तीसगढ़ की उस महान लोकगायिका का निधन हो...
View Articleअनकहीः देश का भविष्य और युवाओं का संघर्ष
- डॉ. रत्ना वर्मादेशकी राजधानी का जंतर-मंतर एक ऐसा स्थान जो कभी जन-आकांक्षाओं, सत्याग्रह और लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रतीक हुआ करता था, आज राजनीति की मुख्य प्रयोगशाला बन चुका है। कोई भी मुद्दा हो-...
View Articleउदंती.com, अगस्त- 2026
वर्ष - 19, अंक - 1"शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।"- नेल्सन मंडेलाअनकहीः देश का भविष्य और युवाओं का संघर्ष - डॉ. रत्ना वर्मायादेंःतीजन बाई के साथ वे...
View Articleकिताबेंः पर्यावरण संकट का जीवंत दस्तावेज
- रोहित कौशिकपुस्तक - तपती धरती, बदलता मौसम और भारत: लेखक: पंकज चतुर्वेदी, ISBN: 978-81-686534-2-9, मूल्य- रु. 350.00 (हार्ड बाउन्ड ), पृष्ठः120, प्रकाशक – नयी किताब प्रकाशन, पंचशील गार्डन, नवीन...
View Articleतीन कविताएँ
- रेखा शाह आरबी 1- शांति की प्रतीक्षा बाहरी शोर और भीतरी शोर दोनों प्रभावित करते है ,दोनों देह पर निशान छोड़ते हैं, इस धींगामुश्ती से अच्छा है ,दोनों से कुछ दूरी पर बैठकर उनके नाट्य देखें, अपनी...
View Articleव्यंग्यः भेंट, एक लेखक से
- गिरिराजशरण अग्रवालनित नए लोगों से भेंट करना और भेंट के दौरान उनकी छठी तक के दूध का हिसाब-किताब मालूम करना हम भारतवासियों की राष्ट्रीय हॉबी है। बिल्कुल इसी तरह जैसे दरिद्रता हमारा राष्ट्रीय गुण है...
View Articleकहानीः बड़ी जिज्जी
- डॉ. रंजना जायसवालमॉलसे बाहर निकलते वक्त एक व्यक्ति को देख निधि के पैर ठिठक गए। अतुल जीजा जी! हाँ ये तो अतुल जीजा ही थे पर उन्होंने तो बड़ी जिज्जी के इस दुनिया के जाने के बाद यह शहर छोड़ दिया था। छोड़...
View Articleजागरूकताः प्राथमिक आवश्यकता- न फैशन न दिखावा
- लिली मित्राएकअच्छी आदत शुरू न कर पाने के कितने बहाने हम दे पाते हैं, हैरत होती है ! जितने बहाने हम सोचते हैं उतनी देर में शायद वो अच्छी आदत शुरू की जा सकती है... नहीं? मैने ये विचार कई बार किया है।...
View Articleसंस्मरणः भाऊ जी
- सुदर्शन रत्नाकर नामतो उनका दरिया दित्ता था, हम सब उन्हें भाऊ जी कहा करते थे। मझोला कद, गेहुँआ रंग लिए गठीला बदन, मुंडा सिर। खादी की सफेद धोती, हल्के भूरे रंग का कुर्ता। पाँवों में खड़ाऊँ। सर्दी...
View Articleकविताः मृत्यु, तू जब भी आना...
- डॉ. पूनम चौधरीमृत्यु,तू जब भी आना, दबे पाँव आना।इतना धीरेकि न टूटेमेरे घर की हवा का संतुलन।न काँपे तेरी आहट सेतुलसी की पत्तियों पर ठहरी ओस।घर के कोनों में न भर देनाअचानक से खालीपन।बस मेरे स्पंदन...
View Articleपर्यावरणः जलवायु परिवर्तन और लुप्त होता अमरनाथ शिवलिंग
- पंकज चतुर्वेदीकरोड़ोंहिंदुओं की गहरी आस्था का केंद्र अमरनाथ यात्रा को चलना तो 57 दिन हैं । तीन जुलाई 2026 को यात्रा शुरू होने के बाद पाँचवें दिन के अंत तक दर्शनार्थियों की संख्या बढ़कर 1,13,800...
View Articleप्रदूषणः ई-कचरे के समाधान की दिशा में बड़ी उपलब्धि
- प्रमोद भार्गवभारत ही नहीं दुनिया ई-कचरे के निस्तारण की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के शोधकर्ताओं ने मेक इन इंडिया के अंतर्गत एक स्वदेशी प्रायोगिक संयंत्र विकसित...
View Articleहाइकुः किसान की कथाएँ
- भीकम सिंह1दूर है कंत रुआँसे लौट रहे सारे बसंत।2उपेक्षित हैं किसान की कथाएँ खेत क्या गाएँ।3मेघों के स्वर बगावत के हैं तो?क्या करें घर।4ढूँढते पाँव सुबह और शाम खेतों में गाँव।5सैंकड़ों बार स्मृतियों...
View Articleलघुकथाः प्रा र्थ ना एँ
- अनिता मण्डा रसोईघर की खिड़की के बाहर छज्जे पर पौधों की टोकरियाँ लटकी हुई हैं। कइयों में मौसमी फूलों के पौधे हैं, कुछ में स्पाइडर प्लांट ख़ूब हरे-भरे लगे हुए हैं। कुछ दिनों से एक चिड़िया का जोड़ा इन पर...
View Articleविज्ञानः झगड़े से बचना हो तो गले मिलें
किसी ने खुलकर गले लगाया हो, ज़ोरदार झप्पी दी हो, तो उसके बाद उस पर बरस पड़ना या उससे जमकर झगड़ना मुश्किल होता है। हमारा यह अनुभव रहा है कि सकारात्मक स्पर्श – हाथ थामना, थपथपाना, सहलाना, आलिंगन वगैरह...
View Articleलघुकथाः सबक
- छवि निगमऋचाके कमरे से बाहर आते ही नीरव दाँत पीसते हुए बुदबुदाया, "ये अंदर मैथ्स की ट्यूशन ले रही थीं या इन हाईस्कूल के स्टूडेंट्स का दिमाग खराब कर रही थीं, हैं!"ऋचा की आवाज शांत थी, "क्लास खत्म...
View Articleबाल कहानीः सिया का सपना
- डॉ. वंदना शर्मा सियास्कूल जाने के लिए घर से निकली ही थी कि अचानक जोर की बारिश शुरू हो गई। बादल ऐसे गरज रहे थे जैसे आसमान भी आज स्कूल जाने से मना कर रहा हो। सिया ने सोचा, "वापस घर चली जाऊँ?"पर फिर मन...
View Articleआलेखः अ द् भु त योगदान देने वाली भारतीय महिला वैज्ञानिक
- निर्देश निधि उनमहिलाओं के योगदान से जुड़ी बातें करें जिन्हें हम अक्सर भुलाए रखते हैं । हम जब भी समाज में महिलाओं के योगदान की बात करते हैं तो उद्यमियों , शिक्षाविदों , साहित्यकारों, विभिन्न...
View Articleअनकहीः नेपाल आपदाः प्रकृति का कहर या...
- डॉ. रत्ना वर्मा नेपालमें हाल की भयावह प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर पूरी दुनिया को यह सोचने के लिए विवश कर दिया है कि आखिर हम ऐसी त्रासदियों को किस नजरिये से देखें। पहाड़ों के बीच अचानक उमड़ा पानी,...
View Articleउदंती.com, सितम्बर - 2026
चित्रः डॉ. सुनीता वर्मा भिलाई, छत्तीसगढ़ वर्ष -19, अंक - 2"प्रकृति का अध्ययन करो, प्रकृति से प्रेम करो, प्रकृति के करीब रहो। प्रकृति तुम्हें कभी निराश नहीं करेगी।" - फ्रैंक लॉयड राइटअनकहीःनेपाल आपदाः...
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